डेहरी-बंजारी रेललाइन परियोजना सिर्फ फाइलों तक सीमित, बजट में मात्र 1000 रूपए हुए आवंटित

डेहरी-बंजारी रेललाइन परियोजना सिर्फ फाइलों तक सीमित, बजट में मात्र 1000 रूपए हुए आवंटित

डेहरी-बंजारी रेललाइन का सपना अभी भी अधूरा, बजट में इस रेल लाइन के लिए नहीं मिली राशि

डेहरी अनुमंडल के दक्षिणी क्षेत्र के लोगों के लिए रेल लाइन का इंतजार और लंबा हो गया है। बंजारी से डेहरी के बीच ट्रेन से यात्रा करने के लिए स्थानीय लोगों को अभी भी आगामी कुछ वर्षों तक इंतजार करना होगा।

बजट 2022-23 में इस क्षेत्र के लोगों को उम्मीद था कि इस बार डेहरी बंजारी रेल लाइन के लिए प्रयाप्त राशि आवंटित की जाएगी। लेकिन पिछले पांच वर्षों की तरह इस बार भी इस रेललाइन परियोजना को मात्र एक हजार रूपए आवंटित किया गया है।

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डेहरी ऑन सोन-रोहतास नैरो गेज रेल लाइन (फाइल फोटो)

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार लगातार इस क्षेत्र के लोगों की अवहेलना कर रही है। मुद्दा सिर्फ रेल लाइन के निर्माण का ही नहीं है बल्कि डालमियानगर में प्रस्तावित रेल वैगन कारखाना को भी सरकार ने ठन्डे बस्ते में डाल दिया है। जिसके कारण इस क्षेत्र के लोग काफी ज्यादा निराश है।

आजादी के पहले वर्ष 1911, इस क्षेत्र के लोगों के लिए ऐतिहासिक पल था क्योंकि इसी समय डेहरी ऑन सोन से रोहतास तक के लिए माल ढुलाई के साथ साथ यात्रियों के लिए भी लाइट रेलवे को शुरू कर दिया गया था। लेकिन अब आजादी के 75वें वर्ष को धूमधाम से मानाने के बावजूद भी इस क्षेत्र के लोगों का दुर्भाग्य है कि अभी तक रोहतास जिले के दक्षिणी क्षेत्र के लोगों को रेल लाइन नसीब नहीं हो सका है।

खैर चिंता मत करिए अगले लोकसभा चुनाव में आपको एक बार फिर से चुनावी झांसा दिया जाएगा। आप शायद इस रेल लाइन पर यात्रा ना कर सकें लेकिन यदि सरकार की मंशा भविष्य में सही रही तो आपके बाल-बच्चे अपने जीवनकाल में कभी न कभी इस रेललाइन पर ट्रेन यात्रा जरूर कर पाएंगे।

डेहरी-बंजारी रेललाइन को वर्ष 2008 में मिली थी मंजूरी लेकिन अभी तक सिर्फ फाइलों में जिन्दा है यह परियोजना

आपको बता दें कि वर्ष 2008 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू यादव ने 106 करोड़ की अनुमानित लागत से डेहरी-बंजारी ब्रॉड गेज रेल लाइन के निर्माण का घोषणा किया था। वित्तीय वर्ष 2008-09 के बजट में इस रेल लाइन परियोजना को जगह भी मिली थी। जिससे इस क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गई थी।

इसके बाद इस रेल लाइन के सर्वे व मिट्टी परीक्षण का कार्य पूरा कराया। सरकार बदलने के बाद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री व काराकाट सांसद उपेंद्र कुशवाहा और सासाराम सांसद छेदी पासवान इसके लिए आवाज उठाते रहें।

वर्ष 2016 के प्रथम तिमाही तक इस योजना पर तीन करोड़ 66 लाख रूपए का खर्च किया गया। वहीं वर्ष 2017-18 में इस कार्य को गति देने के लिए 15 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया था। लेकिन उसके बाद से इस रेल लाइन निर्माण पर पूरी तरीके से ब्रेक लगा दिया गया है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ने इस परियोजना के लिए एक-एक हजार रूपए आवंटित करने के अलावा कुछ नहीं किया है।

आपको बता दें कि यह कार्य काराकाट संसदीय क्षेत्र में भी आता है लेकिन वर्तमान काराकाट सांसद के तरफ से इस रेल लाइन के लिए कोई विशेष पहल नहीं किया गया है। जिसका परिणाम यह है कि इस रेल लाइन का निर्माण कार्य बिलकुल ठप पड़ा हुआ है।

हालांकि सासाराम सांसद छेदी पासवान ने पिछले महीने पटना में आयोजित ZRUCC की बैठक में डेहरी-बंजारी रेल लाइन निर्माण कार्य को शुरू करने एवं इस रेल लाइन का विस्तार डेहरी से बंजारी, रोहतास, रॉबर्ट्सगंज होते हुए चोपन तक करने हेतु आवश्यक कदम उठाने को कहा था। लेकिन वर्तमान समय में उपरोक्त बातों का सरकार पर कोई असर होते हुए नहीं दिख रहा है।

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