1875 का ऐतिहासिक पल जब डेहरी के एनीकट में बना था सोन नदी पर पहला बाँध

1875 का ऐतिहासिक पल जब डेहरी के एनीकट में बना था सोन नदी पर पहला बाँध

सोन नदी के कारण हमारा शहर डेहरी ऑन सोन ब्रिटिश काल से ही अन्य क्षेत्रों के मुकाबले अधिक समृद्ध रहा है। इसका मुख्य कारण यही है कि हमारे शहर की पूर्वी सीमा सोन नदी के किनारे से जुड़ा हुआ है।

क्या आप जानते है कि सोन नदी पर सबसे पहला डैम अपने शहर डेहरी ऑन सोन में ही बनाया गया था? यदि नहीं तो आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के अमरकंटक से उद्गम (origin) होने के बाद उत्तर प्रदेश, झारखण्ड और बिहार के बीच से गुजरने वाली इस नदी पर पहला डैम ब्रिटिश शासन काल में बनाया गया था।

हम बात कर रहें है अपने डेहरी शहर के एनीकट के बारे में जहाँ शहर के लगभग सभी लोगों ने कमसे कम शाम या सुबह का वक्त यहाँ जरूर गुजारा होगा। यह जगह अपने शहर के सबसे शांत, ठंडा एवं दिल को सुकून प्रदान करने वाली जगह है। यहाँ सोन के किनारे का नजारा काफी खूबसूरत और मनमोहक है।

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एनिकट रोड, डेहरी ऑन सोन

तो चलिए हम आपको थोड़ा इतिहास के पन्नों में लिए चलते है जहाँ से आप एनीकट डैम के निर्माण और इस जगह के सौंदर्य का राज जान सकें।

कर्नल सी एच डिकेन्स ने भारत देश का सबसे पुराना एवं सबसे बड़ा सोन नहर प्रणाली का योजना तैयार किया था

कर्नल सी एच डिकेन्स के योजना अनुसार डेहरी ऑन सोन में एनीकट डैम निर्माण के बाद सोन नदी के बहाव को व्यवस्थित एवं नियंत्रित कर लिया गया। इसके अतिरिक्त इसके अन्य महत्वपूर्ण फायदे को भी निम्नानुसार दिए गए है।

1. एनीकट डैम बनने के बाद सोन नदी के बारंबार जलमार्ग परिवर्तन को नियंत्रित किया गया।

2. सोन नदी से प्रति साल आने वाले भयंकर बाढ़ को रोका जा सका।

3. एनीकट डैम बनने के बाद काफी बड़े स्तर सतह अपवाह (surface run-off) के कारण वर्षा जल जैसे प्राकृतिक जल संसाधन की बर्बादी को भी नियंत्रित किया जा सका था।

सोन नहर प्रणाली डेहरी में सोन नदी पर एनीकट डैम से अपनी आपूर्ति प्राप्त करती है, और कार्यों की सामान्य योजना में एक मुख्य पश्चिमी नहर शामिल है, जो बायीं ओर से दूर है और एक मुख्य पूर्वी नहर शाखा से दूर है।

एनीकट डैम, डेहरी – जानें आखिर कब शुरू हुआ डैम बनने का कार्य ?

एनीकट डैम का जब निर्माण हुआ था तब यह 12,469 फ़ीट लम्बा था| जिसमें एक समान ढलान पर बड़ी संख्या में पत्थर के मलबे रखे गए थे और चिनाई की दीवारों द्वारा ठोस किया हुआ उथले कुओं पर स्थापित किया गया था।

वर्ष 1869 में इस डैम का निर्माण शुरू हुआ था और छह वर्ष बाद 1875 में इस कार्य को पूरा कर लिया गया था। उस समय इस डैम के निर्माण की लागत लगभग 15 लाख रूपए थे।

construction of anicut dam in dehri was started in 1869 and was completed in 1875
एनिकट डैम बनने के दौरान ली हुई तस्वीर

1868 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने निर्माण कार्य संभाला और 1873 तक पहले चरण में संचालन शुरू कर पानी को पश्चिमी नहर से आरा तक गुजार दिया था।

1876-77 तक सोन नहर प्रणाली के पश्चिमी और पूर्वी नहर प्रणाली दोनों को पूरा कर लिया गया था।

इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह था कि मुख्य नहरों की कुल लंबाई 209 मील, शाखा नहरों की 149 मील और वितरिका की 1,235 मील थी।

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि 123 मील की नहर जहाजों के चलने युक्त थी।

कुछ वर्षों बाद इंद्रपुरी बराज (Indrapuri Dam 8 km upstream to Anicut, Dehri On Sone) का निर्माण एनीकट, डेहरी ऑन सोन के 8 किलोमीटर ऊपर किया गया था। दो लिंक नहरों को नए जलाशय के साथ साथ पुरानी सिंचाई प्रणाली से जोड़ा और इसे विस्तारित भी किया गया।

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इस ब्रिटिश प्रशासक ने कुछ इस प्रकार किया था सोन नहर प्रणाली का वर्णन

जब इसका निर्माण किया गया, तब यह सिंचाई के क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा प्रयास था। जब इसका निर्माण पूरा हुआ तब सर जॉन होल्टन ने इस बाँध का विवरण कुछ इस प्रकार किया था।

सर जॉन होल्टन एक अनुभवी ब्रिटिश प्रशासक (1949 में) ने सोन नहर प्रणाली को निम्नानुसार वर्णित किया, “यह बिहार में आसानी से सबसे बड़ी नहर प्रणाली है, 209 मील की मुख्य नहरें, 149 मील की शाखा नहरें और 1235 वितरिका हैं। नहरों से खेती को बहुत लाभ होता है। उन्होंने बांझ भूमि के एक बड़े क्षेत्र को एक समृद्ध उत्पादक क्षेत्र में बदल दिया है।”

सर जॉन होल्टन

इस ऐतिहासिक जानकारी का सन्दर्भ और अंश निम्नलिखित जगहों से लिया गया है।

Sir John Houlton, ‘Bihar, The Heart of India’ 2. Gazetteers of Shahabad

विशेष धन्यवाद:- Prabuddha Biswas

हिंदी अनुवाद:- इंद्रजीत कुमार

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